बढ़ती हुई जनसंख्या के अनुपात में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थाओं का अभाव है। माध्यमिक शिक्षा पास करने वाले छात्र/छात्राओं को शिक्षा का अवसर नही मिल पा रहा है। परम्परागत विश्वविद्यालय के माध्यम से सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना एक दुरूह कार्य हो गया है। वर्तमान परिवेश को दृष्टि रखते हुए राज्य एवं केन्द्र सरकार ने इस दिशा में ध्यान देना शुरू किया। किसी भी राष्ट्र का यह परम कर्Ÿाव्य है कि उच्च शिक्षा प्राप्त की अभिलाषा रखने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर सुलभ करायें तमाम शिक्षाविदो ने इस समस्या को दूर करने के लिए विचार/मंथन शुरू किया और वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि परम्परागत शिक्षा प्रणाली के विकल्प को तैयार किया जाए। इस कड़ी में दुरस्थ शिक्षा परिषद की स्थापना हुई जिसके अन्तर्गत केन्द्र एवं प्रत्येक राज्य में एक मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की अनुशंसा की गयी। उत्तर प्रदेश में भी उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना हुई जिसका मुख्य उद्देश्य परम्परागत प्रणली में प्रवेश न पाने वाले छात्रों का प्रवेश,घरेलू महिलाओं के लिये शिक्षा का अवसर, सरकारी एवं गैर सरकारी सेवारत व्यक्तियों के लिये शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास मुक्त विश्वविद्यालय करा रहा है।
उ0 प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केन्द्र जुलाई 2008 में महाविद्यालय में प्रारम्भ हो गया है। इस कोर्स में छात्र /छात्रायें दुरस्थ शिक्षा ;क्पेजंदज स्मंतदपदहद्ध के रूप में अध्ययन कर सकते है। महाविद्यालय में उनकी सहायता के लिए प्रशिक्षित अध्यापक छात्रों की सुविधानुसार कक्षाएँ लेकर उनकी कठिनाई दुर करते हैं। तथा परीक्षा के लिये तैयार करते है। महाविद्यालय अध्यन केंद्र पर B.T.S. (पर्यटन अध्यन में डिप्लोमा), C.T.S. (पर्यटन अध्यन में सर्टिफिकेट कोर्स) DT S, PGDJMC (पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नाकोत्तर डिप्लोमा), MJMC PG DE M & FP (इलेक्ट्रानिक प्रबंधन एवं फिल्म प्रोडक्शन में स्नाकोत्तर डिप्लोमा), (पत्रकारिता एवं जनसंचार में परास्नातक), B.B.A., M.B.A, B.A., B.Sc., B.Com., B.L.I.S., M.A., M.Sc., B.C.A., M.C.A., D.F.D. व एकल विषय में अध्यन की सुविधा उपलब्ध है.